मलयालम सिनेमा का इतिहास (1920s–वर्तमान)

💡त्वरित सार: मलयालम सिनेमा की शुरुआत 1928 की मूक फिल्म विगतकुमारन से हुई और यह स्टूडियो युग, स्वर्णिम काल, 1970 के नव-धारा आंदोलन, 90 के दशक के व्यावसायिक दौर और 2010 के न्यू-जेनेरेशन सिनेमाई बदलावों से विकसित होकर आज वैश्विक पहचान बना चुका है।
मलयालम सिनेमा—जिसे प्यार से मॉलीवुड कहा जाता है—हमेशा से अपनी गहरी कहानी कहने की परंपरा, साहित्यिक जड़ों और बेखौफ़ प्रयोगधर्मिता के लिए पहचाना जाता रहा है।
1920 के दशक की शांत श्वेत-श्याम फिल्मों से लेकर आज के वैश्विक स्तर पर सराहे जाने वाले सिनेमाई अनुभव तक, मलयालम सिनेमा ने यथार्थवाद, भावनाओं और सिनेमाई शिल्प की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ाया है।
यह पोस्ट आपको मॉलीवुड की पूरी यात्रा पर ले जाती है—इसकी शुरुआत, इसके कलात्मक विकास, उन दिग्गजों का योगदान जिन्होंने इसे आकार दिया, और उन फिल्मों का प्रभाव जिन्होंने इसे दुनिया भर में विशेष पहचान दिलाई।
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इस पोस्ट में…
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मूक युग की शुरुआत (1920s–1950s)
मलयालम सिनेमा की शुरुआत विगाथाकुमारन (द लॉस्ट चाइल्ड) से हुई — जिसकी शूटिंग 1928 में और रिलीज़ 1930 में हुई। इसके निर्देशक जे. सी. डैनियल को आज मलयालम सिनेमा के जनक के रूप में सम्मान मिलता है।
इसके बाद बालन (1938) आई — जो पहला मलयालम टॉकी फिल्म थी।
1940 के दशक के अंत में उदय स्टूडियो (1947) और मेरीलैंड स्टूडियो (1951) ने उद्योग को स्थिर दिशा दी।
यह भी देखें:
- मूक से संवाद तक (1927–1935): टॉकीज़ क्रांति की कहानी
- हॉलीवुड का मूक युग और स्टूडियो सिस्टम का उदय (1910s–1920s)
- भारतीय सिनेमा का मूक युग (1913–1931)
थिएटर से सिनेमा की ओर (1950s–1960s)
इस दौर में मलयालम फिल्में थिएटर शैली से गहराई से प्रभावित थीं।
मुख्य बिंदु:
- प्रेम नज़ीर लोकप्रिय सितारे बने
- कथानक नैतिकता, परिवार और समाज पर केंद्रित रहे
- साहित्य और नाटकों के रूपांतर बढ़े
रमू करियट की चेम्मीन (1965) ने नई ऊँचाइयाँ छुईं। यह पहली मलयालम फिल्म थी जिसे राष्ट्रपति स्वर्ण पदक मिला।
(ध्यान दें: पहला दक्षिण भारतीय फिल्म जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था — मलाईक्कल्लन (1954), तमिल।)
स्वर्ण युग — साहित्य और सिनेमा का संगम (1960s–1970s)
इस दौर में साहित्य और सिनेमा का मेल गहरा हुआ।
- एम.टी. वासुदेवन नायर, थकज़ी शिवशंकर पिल्लै और ऊरूब जैसे लेखक
- यथार्थवादी और भावनात्मक कहानियाँ
- थिएटर जैसी नाटकीयता कम, सूक्ष्म चरित्र-आधारित कहानी-कथन
इन्हीं नींवों पर आगे का नवप्रयोगी सिनेमा खड़ा हुआ।
🌟 इस दौर का एक प्रमुख माइलस्टोन: चेम्मीन (1965) ने दिखाया कि मलयालम सिनेमा साहित्यिक ताकत और सामाजिक यथार्थ के सहारे राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकता है।
नई धारा और पैरलल सिनेमा का उदय (1970s–1990s)
यह वह समय था जब मलयालम सिनेमा ने भारत में अनोखा स्थान बनाया।
मुख्य निर्देशक:
- अदूर गोपालकृष्णन — स्वयंवरम, एलीपथायम
- जी. अरविंदन — कंचना सीता, पोक्कुवेइल
- जॉन अब्राहम — प्रयोगशील और यथार्थवादी
- के.जी. जॉर्ज — मनोवैज्ञानिक गहराई (यवनिका)
सिनेमा अधिक दार्शनिक, काव्यात्मक और सामाजिक रूप से गहन बना।
कमर्शियल स्वर्ण युग (1980s–1990s)
यह मलयालम सिनेमा का सबसे चमकदार दौर माना जाता है।
- मोहलाल और ममूटी का अपार प्रभाव
- आईवी ससी, फाज़िल, सत्यन अन्तिकड, प्रियदर्शन जैसे निर्देशक
- परिवार, राजनीति, क्राइम और भावनात्मक ड्रामा केंद्र में रहे
इस दौर की फिल्में मलयाली पॉपुलर कल्चर को आज भी परिभाषित करती हैं।
नई सदी का संक्रमण (2000s–2010s)
इस काल में:
- डिजिटल तकनीक
- नई कहानी शैलियाँ
- ब्लेसी, लाल जोस, रोशन एंड्रयूज़ जैसे निर्देशक
इन सबने आगे के न्यू-जेन युग का रास्ता बनाया।
न्यू-जेन पुनर्जागरण (2010s–वर्तमान)
2010 के दशक से मलयालम सिनेमा ने वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई।
महत्वपूर्ण फिल्में:
- ट्रैफिक (2011)
- दृश्यम (2013)
- बैंगलोर डेज़ (2014)
- कुंबलांगी नाइट्स (2019)
- जल्लीकट्टू (2019) — ऑस्कर एंट्री
- द ग्रेट इंडियन किचन (2021)
इस दौर के निर्देशक — लिजो जोस पेलिस्सेरी, दिलीश पोट्टन, आशिक अबू, महेश नारायणन — विश्व स्तर पर सराहे जा रहे हैं।
समापन — एक क्षेत्रीय सिनेमा से वैश्विक आवाज़ तक
विगतकुमारन (1930) से लेकर आज के अंतरराष्ट्रीय सराहे गए सिनेमा तक — मलयालम फिल्म इंडस्ट्री ने हमेशा अपनी ताकत कहानी-कथन में दिखाई है: गहरे, साधारण जीवन से जुड़े, ईमानदार और कलात्मक।
🎞️ दक्षिण भारतीय सिनेमा श्रृंखला: जानें कि दक्षिण भारत का हर फिल्म उद्योग भारतीय सिनेमा को कैसे बदलता रहा।
- कॉलीवुड (तमिल सिनेमा)
- टॉलीवुड (तेलुगु सिनेमा) — जल्द ही
- सैंडलवुड (कन्नड़ सिनेमा) — जल्द ही
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मलयालम सिनेमा का इतिहास – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्र.1: पहली मलयालम फ़ीचर फ़िल्म कौन-सी थी?
उ. विगथकुमारन (1930), निर्देशक जे.सी. डेनियल।
प्र.2: मलयालम की पहली टॉकी फ़िल्म कब रिलीज़ हुई थी?
उ. बालन (1938) ।
प्र.3: मलयालम सिनेमा के जनक किसे कहा जाता है?
उ. जे.सी. डेनियल।
प्र.4: मलयालम न्यू वेव का प्रमुख निर्देशक कौन है?
उ. अदूर गोपालकृष्णन।
प्र.5: मलयालम पैरेलल सिनेमा की महत्वपूर्ण फ़िल्म कौन-सी है?
उ. एल्लिपथायम (1981) ।
प्र.6: 2023 में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार किस मलयालम फिल्म ने जीता?
उ. 2018: एवरीवन इज़ अ हीरो।
प्र.7: किस मलयालम अभिनेता को “द कम्प्लीट एक्टर” कहा जाता है?
उ. मोहनलाल।
प्र.8: कौन-सा फ़िल्म युग साहित्यिक रूपांतरण और यथार्थवाद के लिए जाना जाता है?
उ. स्वर्णिम युग (1960–1970 का दशक)।
प्र.9: मलयालम सिनेमा को वैश्विक मंच देने वाला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव कौन-सा है?
उ. इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ़ केरला (IFFK)।
प्र.10: आधुनिक दौर की कौन-सी मलयालम फ़िल्म ने वैश्विक OTT दर्शकों का ध्यान खींचा?
उ. कुंबलग़ी नाइट्स (2019) ।
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मलयालम सिनेमा पर और गहराई से जानें
मलयालम सिनेमा की ऐतिहासिक यात्रा, साहित्यिक प्रभाव, नई-नई सिनेमाई धाराओं और वैश्विक पहचान के बारे में और जानने के लिए नीचे दिए गए विश्वसनीय बाहरी संसाधन अवश्य देखें:
- फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन – मलयालम सिनेमा आर्काइव्स
- द हिंदू – मलयालम सिनेमा पर लेख और विश्लेषण
- IMDb – मलयालम फिल्मों का डेटाबेस और रेटिंग्स
- National Film Archive of India (NFAI) – आर्काइवल मटीरियल और फिल्म हिस्ट्री
- Kerala State Chalachitra Academy – ऑफिशियल अपडेट, फेस्टिवल और पब्लिकेशन
- Film Companion Malayalam – रिव्यू और फिल्ममेकर इंटरव्यू
🔖 एट्रिब्यूशन नोट: ये बाहरी स्रोत नई टैब में खुलेंगे और केवल संदर्भ हेतु दिए गए हैं। सभी अधिकार उनके पब्लिशर्स और कंटेंट ओनर्स के हैं।
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