उत्कृष्ट अभिनय से लेकर क्षेत्रीय कहानी कहने की परंपराओं तक, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने भारतीय सिनेमा की अनेक आवाज़ों को एक राष्ट्रीय मंच पर जगह दी।
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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार — भारतीय सिनेमा के विभिन्न क्षेत्रों, परंपराओं और कहानी कहने की संस्कृतियों का एक दृश्यात्मक उत्सव।
The Reel Retro के लिए AI-जनरेटेड दृश्य।
22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 2024 की फिल्मों और फिल्म प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया—Article 370 और Bramayugam से लेकर Amaran और Kalki 2898 AD तक, साथ ही भारत की अनेक भाषाओं में बने सिनेमा को भी राष्ट्रीय पहचान मिली।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने भारतीय सिनेमा की व्यापकता को सामने रखा, जहाँ देश के विभिन्न भाषाई और क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों, फिल्म निर्माण की उपलब्धियों और कहानियों को सम्मानित किया गया।
इन पुरस्कारों में 2024 के दौरान प्रमाणित फिल्मों को शामिल किया गया था। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई 2026 को हुई और 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फिल्मकारों, अभिनेताओं, तकनीशियनों और सिनेमा से जुड़े अन्य पेशेवरों को पुरस्कार प्रदान किए।
प्रमुख विजेताओं में हिंदी फिल्म Article 370 को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि तमिल फिल्म Amaran के लिए राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का सम्मान मिला। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मलयालम फिल्म Bramayugam के लिए ममूटी और हिंदी फिल्म Chandu Champion के लिए कार्तिक आर्यन ने साझा किया, जबकि हिंदी फिल्म Article 370 के लिए यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया।
समारोह का एक और महत्वपूर्ण क्षण था अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया जाना। पाँच दशकों से अधिक लंबे उनके करियर और भारतीय सिनेमा—विशेषकर कन्नड़ सिनेमा—में उनके योगदान को इस सर्वोच्च सम्मान से मान्यता मिली।
लेकिन 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल प्रमुख विजेताओं तक सीमित नहीं रहे। हिंदी, मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ सहित कई भारतीय भाषाओं के सिनेमा के साथ-साथ वृत्तचित्रों, गैर-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर लेखन को भी सम्मान मिला।
समग्र रूप से देखें तो ये पुरस्कार समकालीन भारतीय सिनेमा की एक महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करते हैं—एक ऐसे सिनेमा की, जो किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक भाषाओं, परंपराओं और कहानी कहने की संस्कृतियों से मिलकर बना है।
📑 इस लेख में

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करती हुईं।
छवि स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: एक नज़र में
- संस्करण: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
- सम्मानित फिल्में: 2024 के दौरान प्रमाणित फिल्में
- विजेताओं की घोषणा: 18 जुलाई 2026
- पुरस्कार समारोह: 22 सितंबर 2026
- स्थान: एकता नगर, गुजरात
- पुरस्कार प्रदान किए गए: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा
- सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म: Article 370 (हिंदी)
- सर्वश्रेष्ठ निर्देशन: राजकुमार पेरियासामी — Amaran (तमिल)
- सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: ममूटी — Bramayugam (मलयालम) और कार्तिक आर्यन — Chandu Champion (हिंदी), संयुक्त
- सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: यामी गौतम — Article 370 (हिंदी)
- संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म: Kalki 2898 AD (तेलुगु)
- दादासाहेब फाल्के पुरस्कार: अनंत नाग — दिग्गज कन्नड़ अभिनेता
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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रमुख विजेता
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रमुख सम्मान फीचर फिल्म, अभिनय, निर्देशन और लोकप्रिय सिनेमा सहित कई श्रेणियों में दिए गए, जिनमें भारत की विभिन्न भाषाओं और फिल्म निर्माण परंपराओं का प्रतिनिधित्व दिखाई दिया। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई 2026 को किए जाने के साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पुरस्कार पाने वालों की पूरी सूची भी जारी की।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रमुख सम्मानों में Article 370, Amaran, Bramayugam और Chandu Champion को मिली पहचान शामिल रही।
The Reel Retro के लिए AI-जनरेटेड दृश्य।
| पुरस्कार | विजेता / फिल्म |
|---|---|
| सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म | Article 370 (हिंदी) |
| सर्वश्रेष्ठ निर्देशन | राजकुमार पेरियासामी — Amaran (तमिल) |
| सर्वश्रेष्ठ अभिनेता — मुख्य भूमिका | ममूटी — Bramayugam (मलयालम) और कार्तिक आर्यन — Chandu Champion (हिंदी), संयुक्त |
| सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री — मुख्य भूमिका | यामी गौतम — Article 370 (हिंदी) |
| सर्वश्रेष्ठ अभिनेता — सहायक भूमिका | संजय मिश्रा — Bhakshak (हिंदी) |
| सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री — सहायक भूमिका | सचाना नामिदास — Maharaja (तमिल) और रूपश्री वरकाडी — Mithya (कन्नड़), संयुक्त |
| निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म | रणदीप हुड्डा — Swatantrya Veer Savarkar (हिंदी) |
| संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म | Kalki 2898 AD (तेलुगु) |
| राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म | Captain Miller (तमिल) |
| सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म | 35 – Chinna Katha Kaadu (तेलुगु) |
| सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म | Bhangaar (मराठी और अंग्रेज़ी) |
| सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र | Ram-Nami (हिंदी) |
इन प्रमुख सम्मानों को एक साथ देखें तो 72वें संस्करण की भाषाई और क्षेत्रीय व्यापकता स्पष्ट होती है। हिंदी सिनेमा ने कई प्रमुख पुरस्कार हासिल किए, जबकि मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मराठी फिल्मों को अभिनय, निर्देशन, लोकप्रिय सिनेमा, बाल फिल्म और गैर-फीचर श्रेणियों में भी पहचान मिली।
पुरस्कारों का दायरा इन भाषाओं तक सीमित नहीं रहा। अन्य श्रेणियों में बंगाली, गढ़वाली, तुलु और संथाली भाषाओं की फिल्मों को भी मान्यता मिली।
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Article 370 बनी सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म
Article 370 ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार जीतकर 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का प्रमुख फीचर फिल्म सम्मान अपने नाम किया। आदित्य सुहास जांभले द्वारा निर्देशित और Jio Studios तथा B62 Studios द्वारा निर्मित इस हिंदी फिल्म को 2024 में प्रमाणित भारतीय फिल्मों में से इस सम्मान के लिए चुना गया।
फिल्म की सफलता केवल शीर्ष पुरस्कार तक सीमित नहीं रही। यामी गौतम को मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला, जबकि शाश्वत सचदेव ने सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (गीत) का सम्मान हासिल किया। इस तरह Article 370 को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के साथ अभिनय और संगीत के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
जहाँ Article 370 ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का प्रमुख सम्मान हासिल किया, वहीं 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों को भी कई महत्वपूर्ण श्रेणियों में पहचान मिली।
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ममूटी और कार्तिक आर्यन ने साझा किया सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान
मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दो अलग-अलग सिनेमाई परंपराओं के कलाकारों ने साझा किया—मलयालम फिल्म Bramayugam के लिए ममूटी और हिंदी फिल्म Chandu Champion के लिए कार्तिक आर्यन।
ममूटी के सम्मान ने मलयालम सिनेमा को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की सबसे प्रमुख श्रेणियों में स्थान दिलाया। Bramayugam में उनका अभिनय उस फिल्म उद्योग की निरंतर राष्ट्रीय पहचान को भी दर्शाता है, जो विशिष्ट कहानी कहने, मजबूत क्षेत्रीय पहचान और फिल्मकार-केंद्रित सिनेमा की लंबी परंपरा के लिए जाना जाता है।
इस समकालीन पहचान की जड़ें कहीं अधिक गहरी हैं। न्यू वेव और समानांतर सिनेमा से लेकर केरल से बाहर व्यापक दर्शकों तक पहुँचने वाली नई पीढ़ी की फिल्मों तक, मलयालम सिनेमा का विकास कलात्मक प्रयोगों, साहित्यिक प्रभाव और कहानी कहने के बदलते तरीकों से आकार लेता रहा है।
वहीं, कार्तिक आर्यन को Chandu Champion के लिए यह साझा सम्मान मिला। कबीर खान द्वारा निर्देशित यह हिंदी जीवनीपरक खेल-ड्रामा है। इस संयुक्त पुरस्कार ने दो अलग-अलग फिल्मों और दो अलग-अलग भाषा-आधारित फिल्म उद्योगों के अभिनय को एक ही राष्ट्रीय श्रेणी में स्थान दिया।
उनका साझा सम्मान 72वें संस्करण की एक महत्वपूर्ण विशेषता को भी दर्शाता है—प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कार भारत के अलग-अलग हिस्सों से उभरती फिल्मों और कलाकारों तक पहुँचे।
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Article 370 के लिए यामी गौतम बनीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री
यामी गौतम को Article 370 में उनके अभिनय के लिए मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला, जिससे फिल्म की उपलब्धियों में एक और प्रमुख सम्मान जुड़ गया।
इस पुरस्कार ने गौतम के अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान दी और उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रमुख अभिनय विजेताओं में ममूटी और कार्तिक आर्यन के साथ स्थान दिया।
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Amaran और राजकुमार पेरियासामी: तमिल सिनेमा सुर्खियों में
तमिल सिनेमा ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फिल्म निर्माण से जुड़ा एक प्रमुख सम्मान हासिल किया, जब राजकुमार पेरियासामी को Amaran के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार मिला।
Amaran को एक और सम्मान मिला, जब जी. वी. प्रकाश कुमार ने सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (पार्श्व संगीत) का पुरस्कार जीता। इस तरह फिल्म को निर्देशन और संगीत—दोनों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
यह उपलब्धि तमिल सिनेमा के लंबे इतिहास की निरंतर विकसित होती यात्रा का भी हिस्सा है। शुरुआती स्टूडियो परंपराओं और प्रभावशाली सितारों से लेकर बदलती कथा-शैलियों और समकालीन फिल्म निर्माण तक, तमिल सिनेमा अपनी मजबूत भाषाई और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए लगातार विकसित हुआ है।
अन्य प्रमुख पुरस्कारों में भी तमिल फिल्मों की उपस्थिति रही। Captain Miller को राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि Maharaja में अभिनय के लिए सचाना नामिदास ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार साझा किया। Amaran के साथ इन सम्मानों ने निर्देशन, संगीत, अभिनय और फीचर-फिल्म श्रेणियों में तमिल सिनेमा की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
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अनंत नाग को मिला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार
दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को 2024 के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पाँच दशकों से अधिक लंबे उनके करियर और भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान करती हुईं।
छवि स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार।
नाग की अभिनय यात्रा रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन तक फैली है। रंगमंच से अपने अभिनय जीवन की शुरुआत करने के बाद उन्होंने 1970 के दशक में फिल्मों की ओर रुख किया और छह भारतीय भाषाओं में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उनका काम समानांतर सिनेमा से जुड़ी शुरुआती फिल्मों से लेकर कन्नड़ सिनेमा में उनके व्यापक करियर तक फैला है, जहाँ उन्होंने उद्योग के सबसे पहचाने जाने वाले अभिनेताओं में अपनी जगह बनाई।
उनका करियर कन्नड़ सिनेमा के इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर से भी जुड़ता है—विशेषकर साहित्यिक परंपराओं, यथार्थवादी कहानी कहने और समानांतर सिनेमा से उसके संबंध के संदर्भ में। कन्नड़ फिल्म निर्माण के बदलते दौरों में काम करते हुए नाग ने इस उद्योग से अपना गहरा संबंध बनाए रखा, जबकि उनके अभिनय ने दूसरी भारतीय भाषाओं के दर्शकों तक भी अपनी पहुँच बनाई।
सम्मान प्राप्त करने के बाद नाग ने अपने सफर से जुड़े सहकर्मियों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया और कर्नाटक को अपनी कर्मभूमि बताया। उनके शब्द भारतीय सिनेमा में उनके व्यापक करियर और कन्नड़ संस्कृति तथा फिल्म निर्माण से उनके लंबे जुड़ाव—दोनों को रेखांकित करते हैं।
1969 में स्थापित और अग्रणी फिल्मकार दादासाहेब फाल्के के नाम पर दिया जाने वाला यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में दीर्घकालीन योगदान को सम्मानित करता है। किसी एक फिल्म या अभिनय के लिए दिए जाने वाले पुरस्कारों से अलग, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार पूरे करियर में किए गए योगदान का सम्मान है। इसी संदर्भ में अनंत नाग की उपलब्धि भारतीय सिनेमा के निरंतर विकसित होते इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है।
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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में क्षेत्रीय सिनेमा
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने भारतीय सिनेमा के बहुभाषी स्वरूप को स्पष्ट रूप से सामने रखा। मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ सिनेमा को कई प्रमुख श्रेणियों में सम्मान मिला। ये फिल्में केवल भाषा-विशेष श्रेणियों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अभिनय, निर्देशन, संगीत, लोकप्रिय सिनेमा और अन्य राष्ट्रीय श्रेणियों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहीं।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की प्रमुख श्रेणियों में मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ सिनेमा की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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मलयालम और तमिल सिनेमा की उल्लेखनीय मौजूदगी Bramayugam, Amaran, Captain Miller और Maharaja को मिले सम्मानों में दिखी। इन उपलब्धियों ने क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को इस संस्करण की कुछ महत्वपूर्ण अभिनय और फिल्म निर्माण श्रेणियों में स्थान दिलाया।
तेलुगु सिनेमा ने इस विविधता में एक और आयाम जोड़ा। Kalki 2898 AD को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि 35 – Chinna Katha Kaadu को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म चुना गया—दो ऐसी फिल्मों को सम्मान मिला, जिनका पैमाना और कहानी कहने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग था।
कन्नड़ सिनेमा का प्रतिनिधित्व रूपश्री वरकाडी ने किया, जिन्होंने Mithya के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार साझा किया। कन्नड़ भाषा में सिनेमा पर लेखन को भी पहचान मिली और Naaniruvude Nimagaagi Naadiruvude Nanagaagi: Kannada Cinemada Thathva matthu Rajakeeya को सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार दिया गया।
इन सम्मानों को एक साथ देखें तो स्पष्ट होता है कि भारतीय सिनेमा की क्षेत्रीय विविधता केवल अलग-अलग भाषा श्रेणियों तक सीमित नहीं रही। अभिनय, निर्देशन, संगीत, लोकप्रिय मनोरंजन, बाल सिनेमा और फिल्म लेखन तक अलग-अलग फिल्म परंपराओं की मौजूदगी ने 72वें संस्करण को एक विशिष्ट बहुभाषी स्वरूप दिया।
यह भाषाई विस्तार यहीं समाप्त नहीं हुआ। गढ़वाली, तुलु और संथाली सिनेमा को मिली पहचान ने बड़े भारतीय फिल्म उद्योगों से परे पुरस्कारों के भौगोलिक और सांस्कृतिक दायरे को और व्यापक बनाया।
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प्रमुख भाषाओं से आगे: गढ़वाली, तुलु और संथाली सिनेमा
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का दायरा भारत के बड़े फिल्म उद्योगों से आगे बढ़ा और गढ़वाली, तुलु तथा संथाली सिनेमा को भी राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली।

भारत की अनेक क्षेत्रीय और भाषाई फिल्म निर्माण परंपराएँ मिलकर राष्ट्रीय सिनेमा के विविधतापूर्ण परिदृश्य को आकार देती हैं।
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दिनेश पी. भोंसले द्वारा निर्देशित Dholi को सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि शिवध्वज शेट्टी द्वारा निर्देशित IMBU को सर्वश्रेष्ठ तुलु फिल्म चुना गया। इन सम्मानों ने ऐसी फिल्म परंपराओं की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिन्हें मुख्यधारा की राष्ट्रीय चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान मिलता है।
संथाली सिनेमा ने Angen के माध्यम से एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। रवि राज मुर्मू द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने गैर-फीचर फिल्म खंड में निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म का पुरस्कार जीता। आधिकारिक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथ्यपत्र के अनुसार, यह पहली बार था जब किसी संथाली फिल्म को गैर-फीचर फिल्म खंड में सम्मान मिला।
इन पुरस्कारों ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दिखाई देने वाली सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को और व्यापक बनाया। स्थापित फिल्म उद्योगों के साथ इन कृतियों की मौजूदगी ने भारतीय सिनेमा की उस व्यापक तस्वीर को सामने रखा, जिसमें अलग-अलग भाषाओं, समुदायों और क्षेत्रों की अपनी कहानी कहने की परंपराएँ शामिल हैं।
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गैर-फीचर फिल्में, वृत्तचित्र और सिनेमा पर लेखन
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का दायरा फीचर फिल्मों से आगे बढ़कर वृत्तचित्रों, गैर-फीचर फिल्मों और सिनेमा की समझ को गहरा करने वाले लेखन तक पहुँचा। इन श्रेणियों ने भारतीय फिल्म संस्कृति के उस पक्ष को सामने रखा, जिसे मुख्यधारा की फीचर फिल्मों से अलग काम करने वाले फिल्मकार, वृत्तचित्र निर्माता, लेखक और समीक्षक आकार देते हैं।
गैर-फीचर फिल्म खंड में सुमिरा रॉय की मराठी और अंग्रेज़ी में बनी Bhangaar को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि भारतबाला गणपति द्वारा निर्देशित Ram-Nami को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र चुना गया। रवि राज मुर्मू की संथाली फिल्म Angen को निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म का सम्मान मिला, जो इस खंड की एक उल्लेखनीय उपलब्धि भी रही।
इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विषयों की पड़ताल करने वाली फिल्मों को भी मान्यता मिली। Kakori को सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक/ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि Piplantri: A Tale of Eco Feminism को सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म चुना गया।
पुरस्कारों ने सिनेमा के अध्ययन और आलोचना को भी सम्मानित किया। केनचनूरु प्रदीप कुमार शेट्टी को कन्नड़ भाषा की पुस्तक Naaniruvude Nimagaagi Naadiruvude Nanagaagi: Kannada Cinemada Thathva matthu Rajakeeya के लिए सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार मिला, जबकि संजीव श्रीवास्तव को हिंदी में उनके लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का सम्मान दिया गया।
ये श्रेणियाँ याद दिलाती हैं कि भारतीय फिल्म संस्कृति केवल फीचर फिल्मों और अभिनय से नहीं बनती। वृत्तचित्र, गैर-फीचर फिल्में, पुस्तकें और आलोचना भी सिनेमा को दर्ज करने, उसे समझने और आने वाली पीढ़ियों के लिए उसकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार गुजरात में क्यों आयोजित किए गए?
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के आयोजन स्थल में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। 22 सितंबर 2026 को पुरस्कार गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निकट प्रदान किए गए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को संबोधित करती हुईं।
छवि स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार।
यह आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की उस व्यापक पहल से जुड़ा था, जिसके तहत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को राष्ट्रीय राजधानी से बाहर ले जाने की योजना बनाई गई है। इस दृष्टिकोण के अंतर्गत भविष्य में समारोहों को अलग-अलग राज्यों और शहरों में आयोजित करने की परिकल्पना की गई है, ताकि इस राष्ट्रीय आयोजन की भौगोलिक पहुँच और व्यापक हो सके।
समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस स्थान को भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों में बनने वाली फिल्में देश की विविध परंपराओं, आकांक्षाओं और अनुभवों को अभिव्यक्त करती हैं। इस संदर्भ में, एकता नगर पूरे भारत के सिनेमा का उत्सव मनाने वाले इस समारोह के लिए एक प्रतीकात्मक स्थान बन गया।
देश के अलग-अलग हिस्सों में समारोह आयोजित करने की यह पहल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में एक नया आयाम भी जोड़ती है। यदि यह व्यवस्था आने वाले संस्करणों में जारी रहती है, तो बदलते आयोजन स्थल उस क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधता को अधिक निकटता से प्रतिबिंबित कर सकते हैं, जिसका ये पुरस्कार सम्मान करते हैं।
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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के बारे में क्या बताते हैं?
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल अलग-अलग विजेताओं की सूची नहीं हैं। सभी प्रविष्टियों और सम्मानों को एक साथ देखने पर भारतीय सिनेमा की ऐसी तस्वीर सामने आती है, जो अनेक भाषाओं, अलग-अलग तरह के फिल्म निर्माण और विविध कहानी कहने की परंपराओं से बनी है।
आँकड़े इस व्यापकता को स्पष्ट करते हैं। 72वें संस्करण में 34 भाषाओं की 400 फीचर फिल्मों और 24 भाषाओं की 161 गैर-फीचर फिल्मों की प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। इनमें बड़े व्यावसायिक निर्माण से लेकर वृत्तचित्र, स्वतंत्र फिल्में और विशिष्ट क्षेत्रीय तथा भाषाई परंपराओं में बनी कृतियाँ शामिल थीं।
प्रमुख पुरस्कारों का वितरण भी इसी विविधता को दर्शाता है और भारत में क्षेत्रीय सिनेमा के व्यापक परिदृश्य को सामने लाता है। हिंदी, मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों को प्रमुख श्रेणियों में सम्मान मिला, जबकि गढ़वाली, तुलु और संथाली कृतियों को मिली पहचान ने पुरस्कारों का दायरा देश के बड़े फिल्म उद्योगों से आगे बढ़ाया। गैर-फीचर फिल्म खंड में किसी संथाली फिल्म को पहली बार मिला सम्मान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
परिणाम यह भी दिखाते हैं कि फिल्म निर्माण के अलग-अलग रूप एक ही राष्ट्रीय मंच पर स्थान पा सकते हैं। लोकप्रिय सिनेमा के साथ वृत्तचित्र, बाल फिल्में, सामाजिक विषयों पर आधारित कृतियाँ और गैर-फीचर फिल्में भी मौजूद रहीं, जबकि पुस्तकों और फिल्म आलोचना के पुरस्कारों ने सिनेमा को समझने और उसकी व्याख्या करने वाली व्यापक संस्कृति को भी मान्यता दी।
इस दृष्टि से देखें तो 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा को किसी एक भाषा या क्षेत्र के इर्द-गिर्द केंद्रित उद्योग के रूप में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ विकसित होती और संवाद करती अनेक फिल्म संस्कृतियों के व्यापक ताने-बाने के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
इस संस्करण ने भारतीय सिनेमा की एक बुनियादी विशेषता को फिर रेखांकित किया—इसकी विविधता इसकी पहचान के हाशिये पर नहीं, बल्कि उसके केंद्र में है। स्थापित फिल्म उद्योगों और बड़े निर्माणों से लेकर उभरते फिल्मकारों और कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं तक, पुरस्कारों ने भारतीय फिल्म निर्माण की अनेक अभिव्यक्तियों को एक राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिया।
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मुख्य बातें
- 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 2024 के दौरान प्रमाणित फिल्मों को सम्मानित किया गया और पुरस्कार 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में औपचारिक रूप से प्रदान किए गए।
- Article 370 ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार जीता, जबकि फिल्म में अपने अभिनय के लिए यामी गौतम को मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया।
- ममूटी और कार्तिक आर्यन ने मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार साझा किया, क्रमशः Bramayugam और Chandu Champion के लिए, जबकि राजकुमार पेरियासामी को Amaran के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का सम्मान मिला।
- दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला, जिसके माध्यम से भारतीय सिनेमा में पाँच दशकों से अधिक लंबे उनके योगदान को सम्मानित किया गया।
- भागीदारी का पैमाना भारतीय सिनेमा की भाषाई व्यापकता को दर्शाता है—इस संस्करण में 34 भाषाओं की 400 फीचर फिल्मों और 24 भाषाओं की 161 गैर-फीचर फिल्मों की प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं।
- प्रमुख हिंदी, मलयालम, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों से लेकर गढ़वाली, तुलु और संथाली सिनेमा तक को पहचान मिली, जबकि वृत्तचित्रों, गैर-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर लेखन ने पुरस्कारों के दायरे को मुख्यधारा की फीचर फिल्मों से कहीं आगे बढ़ाया।
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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म कौन-सी रही?
Article 370 ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार जीता। इस हिंदी फिल्म का निर्देशन आदित्य सुहास जांभले ने किया।
2. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता कौन बने?
ममूटी और कार्तिक आर्यन ने मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार साझा किया। ममूटी को मलयालम फिल्म Bramayugam और कार्तिक आर्यन को हिंदी फिल्म Chandu Champion के लिए सम्मानित किया गया।
3. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री कौन बनीं?
यामी गौतम को मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार Article 370 में उनके अभिनय के लिए मिला। इसी फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार भी जीता।
4. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार किसे मिला?
अनंत नाग को 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला, जो भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है। इस पुरस्कार के माध्यम से भारतीय सिनेमा में पाँच दशकों से अधिक लंबे उनके योगदान को सम्मानित किया गया।
5. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2024 के लिए हैं, जबकि समारोह 2026 में क्यों हुआ?
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2024 के कैलेंडर वर्ष के दौरान प्रमाणित फिल्मों को सम्मानित करते हैं। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई 2026 को हुई और पुरस्कार 22 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से प्रदान किए गए।
6. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कहाँ आयोजित किए गए?
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह 22 सितंबर 2026 को एकता नगर (केवड़िया), गुजरात में आयोजित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
7. किन क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में प्रमुख पहचान मिली?
कई क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को प्रमुख सम्मान मिले। मलयालम फिल्म Bramayugam के लिए ममूटी ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का संयुक्त पुरस्कार जीता, तमिल फिल्म Amaran के लिए राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का सम्मान मिला और तेलुगु फिल्म Kalki 2898 AD को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म चुना गया। कन्नड़, गढ़वाली, तुलु और संथाली कृतियों को भी विभिन्न श्रेणियों में पहचान मिली।
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निष्कर्ष
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने भारतीय फिल्म निर्माण के व्यापक स्वरूप को सामने रखा, जहाँ बड़े स्तर की फिल्मों, प्रशंसित अभिनय, क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा, वृत्तचित्रों और गैर-फीचर फिल्मों को एक ही राष्ट्रीय मंच पर स्थान मिला।
अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किए जाने ने समारोह में एक ऐतिहासिक आयाम जोड़ा और समकालीन उपलब्धियों को पाँच दशकों से अधिक लंबे एक अभिनय करियर से जोड़ा। वहीं स्थापित सितारों, उभरते फिल्मकारों और अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं को मिली पहचान ने भारतीय सिनेमा के बढ़ते विस्तार को भी सामने रखा।
2024 की फिल्मों और फिल्म प्रतिभाओं को मिले सम्मानों से आगे, 72वाँ संस्करण भारतीय सिनेमा की निरंतर विकसित होती यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में भी सामने आया—अनेक सिनेमाई परंपराएँ, प्रत्येक की अपनी विशिष्ट पहचान, लेकिन सभी मिलकर भारतीय सिनेमा की एक बड़ी और लगातार विकसित होती कहानी का हिस्सा।
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72nd National Film Awards: Winners, Highlights and Indian Cinema’s Regional Diversity
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